फर्जी इंटरमीडिएट अंक पत्रों के साथ कॉलेजो में एडमिशन लेने वाले छात्रों को जाना पड़ सकता है जेल

बयूरो रिपोर्ट : फर्जी अंक पत्रों की भरमार पूरे देश में दीमक की तरह फैली हुई है, “इसी को लेकर सरकार कई बड़े कदम उठा चुकी है लेकिन अभी भी ऐसे कई सारे बोर्ड हैं जो फर्जी मार्कशीट बनाकर लोगो को दे रहें हैं।

  ऐसे ही सन 2016 में कुछ मामले सामने आये और अब भी ऐसे कई मामले सामने आते रहते है।  इस गंभीर इस्थिति के चलते वो छात्र जो मेहनत कर अच्छे अंक प्राप्त करके कॉलेजो में एडमिशन लेना चाहते हैं उन छात्रों को इन फर्जी छात्रों के मुकाबले दाखिले कम मिलते है।  इसी के चलते सरकार ने कड़े निर्देश देते हुए कहा है जिस कॉलेज में ऐसे छात्रों के दाखिले पाए गए हैं उन छात्रों पे सरकार कानूनी कार्यवाही कर उनको जेल भेजने का कार्य कर रही है।  जिस भी जिला या प्रांत में ऐसे मामले सामने आये हैं उसमे उत्तर प्रदेश सबसे टॉप पर है।  इसी के चलते सरकार ने बताया कई बोर्ड ऐसे हैं जिनको बोर्ड परीक्षा कराने की अनुमति नहीं है लेकिन , आज भी वो बोर्ड्स बच्चो को मार्कशीट प्रदान करा रहे है , ऐसे में गुरुकुल विश्वविधालय की मान्यता 2006 में लेली गयी थी लेकिन गुरुकुल विश्वधालय से 2006 के बाद भी कई फर्जी मार्कशीट हैं जिनके आधार पर अभी भी छात्रों को दाखिले दिए जा रहे हैं। अब परससान का  यह है कि एडमिशन जैसे ही शरू होते है तो इन लोगो पर कड़ी नजर रक्खी जायेगी और ऐसे फर्जीवाड़े दस्तावेजों को पकड़कर उनलोगो पे सख्त कार्यवाही की जायेगी। परसासन ने ऐसे कई फर्जी दस्तावेज हाल फिलहाल में कई कॉलेजो से बरामद किये है। उत्तर प्रदेश के मेरठ के कई कॉलेज इसमें अव्वल नंबर पर हैं जिनमे छात्रों को ऐसे दस्तावेजों पर दाखिले दिए गए हैं।  परसासन ने कॉलेजो को सख्त निर्देश देते हुए कहा है ऐसे फर्जी दस्तावेजों की जानकारी वो खुद परसासन को दे।  अब फर्जी मार्कशीटों के आधार पर एडमिशन लेने वालो की खैर नहीं है।  कुछ बोर्ड और स्कूल अभी भी फर्जी दस्तावेज बनाकर दे रहे है जिनमे कई मामले वृंदावन गुरुकुल , नेशनल इंस्टिट्यूट  ऑफ़ ओपन स्कूल जैसे कई बोर्ड शामिल हैं।  परसासन ने कहा है ऐसे दस्तावेज  वालो पर उनकी पैनी नजर बानी हुई है। जिनके पास ऐसे दस्तावेज बरमाद किये जाएंगे उनको जेल और भारी जुरमाना भरना पड़सकता है।

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