वैश्विक महामारी ने एक तरफ जहां लोगों के जीवन शैली पर असर डाला है तो वहीं तेजी से बढ़ती

वैश्विक महामारी ने एक तरफ जहां लोगों के जीवन शैली पर असर डाला है तो वहीं तेजी से बढ़ती

महंगाई ने भी जनता की कमर तोड़ दी है। सब्जियों की बात करें तो वर्तमान समय में किचन की रौनक बढ़ाने वाले सब्जियों के राजा कहे जाने वाले आलू के भाव आसमान छू रहे हैं। आलू भी अब भाव खाने लगा है। आलू ने तो अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं दुकानदारों की मानें तो आज तक इतना महंगा आलू नहीं हुआ।

आलू के दाम फुटकर बाजार में अचानक बढ़कर में 45 से 50 रुपए प्रति किलो हो गए हैं, तो वही प्याज के दाम में भी तेजी आ गई है। फुटकर बाजार में प्याज की कीमत 60 से 80 रुपए प्रति किलो है।
वैश्विक महामारी ने एक तरफ जहां लोगों के जीवन शैली पर असर डाला है तो वहीं तेजी से बढ़ती महंगाई ने भी जनता की कमर तोड़ दी है। सब्जियों की बात करें तो वर्तमान समय में किचन की रौनक बढ़ाने वाले सब्जियों के राजा कहे जाने वाले आलू के भाव आसमान छू रहे हैं। आलू भी अब भाव खाने लगा है। आलू ने तो अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं दुकानदारों की मानें तो आज तक इतना महंगा आलू नहीं हुआ।

आलू के दाम फुटकर बाजार में अचानक बढ़कर में 45 से 50 रुपए प्रति किलो हो गए हैं, तो वही प्याज के दाम में भी तेजी आ गई है। फुटकर बाजार में प्याज की कीमत 60 से 80 रुपए प्रति किलो है।

कोरोना महामारी की मार झेल रही जनता को अब आलू और प्याज के बढ़ते दाम में बेहाल कर दिया है। आलू और प्याज के बढ़ते दामों ने किचन का जायका बिगाड़ दिया है, जिससे आम आदमी परेशान है। महेवा मंडी आलू में आलू के थोक दाम 32 से 38 रुपए प्रति किलो और फुटकर में 45 से 50 प्रति किलो हो गया है।

एक तरफ जहां वैश्विक महामारी ने लोगों को चारों तरफ से मुश्किलों में डाल दिया किसी का रोजगार छीन लिया तो किसी की नौकरी चली गई छोटे-छोटे कारोबारी बेरोजगार हो गए ।तो वहीं अब कोरोना महामारी के बाद आम लोगो कि मुश्किलो को बढ़ा दिया आलू। अमीर वर्ग के लोगों को तो कोई फर्क नही पड़ेगा लेकिन माध्यम और गरीब, मजदूर, किसान के लिए आलू और प्याज जरूरी आहार होता है, अब उनके घरों से भी आलू गायब होंगे।

आलू की लगातार बढ़ती कीमतें आसमान छू रही है। फुटकर खरीदारों का कहना है कि बिक्री में काफी फर्क पड़ा है क्योंकि पहले 2 से 3 किलो 5 किलो या ज्यादा लोग आलू खरीदते थे, अब एक से आधा किलो आलू खरीद रहे हैं। मंडी व्यवसायियों का भी कहना है कि जब यहां पर 32 से 38 रुपए प्रति किलो आलू बिक रहे हैं तो जाहिर सी बात है, फुटकर में 45 रुपए किलो से अधिक ही लोग बेच रहे होंगे। आलू की बढ़ती कीमतों की वजह से बिक्री भी कम होती जा रही है।

एक तरफ जहां देखा जाए तो कोरोना महामारी के बाद आलू की बढ़ती हुई कीमतों में इजाफा हर आम आदमी के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा। वहीं दूसरी तरफ नवरात्र का पर्व भी है ऐसा कहा जा रहा है कि नवरात्र भर आलू के दामों में काफी इजाफा होगा। प्याज और आलू के थोक विक्रेता तबरेज राइन ने बताया कि आजादी के बाद से आलू कभी इतनी महंगी नहीं हुई थी, आजादी के बाद से अपने होस में पहली बार इतना महंगा आलू बिकते देखा है।

तबरेज राइन ने बताया कि बारिश की वजह से किसानों की फसलें बर्बाद हो गई है जिसकी वजह से आलू और प्याज के दाम में तेजी आ गई है आने वाले कुछ दिनों तक अभी भाव इसी तरह से रहने वाली है। आलू और प्याज की बढ़ती कीमतों की वजह से दुकानदारी कम हो गई है। नई फसल की पैदावार में अभी समय लगेगा तब तक रेट इसी तरह रहने की उम्मीद है।
Shweta Singh

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