आज ब्रह्माकुमारी के द्वारा महाशिवरात्रि के उपलक्ष में कार्यक्रम का

आज  ब्रह्माकुमारी के द्वारा महाशिवरात्रि के उपलक्ष में कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि भाजपा नेता गोपाल शर्मा रहे तथा कार्यक्रम में मुख्य वक्ता दीदी मंजू रही, कार्यक्रम में गुलाब सिंह अतिथि के रूप में रहे तथा कार्यक्रम का कुशल संचालन दीदी सुनीता ने किया। दीदी मंजू ने उपस्थित सभी श्रोताओं को महाशिवरात्रि पर्व के बारे में समझाया तथा बताया कि शिव ही सर्वव्यापी हैं तथा निराकार हैं और हम महाशिवरात्रि पर्व पर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं लेकिन जब तक हम अपने अंदर की बुराइयों को समाप्त नहीं करेंगे और परोपकार के मार्ग पर नहीं चलेंगे तब तक हमें पूजा करने या जलाभिषेक करने का लाभ प्राप्त नहीं होगा इसलिए शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के साथ-साथ हमें अपने अंदर की बुराइयों पर भी जल डालकर उन्हें धो देना चाहिए तथा अपनी अंतरात्मा का पुनः निर्माण कर हमें सच्चाई और परोपकार के मार्ग पर चलना चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता गोपाल शर्मा ने उपस्थित माताओं, बहनों, बुजुर्गों तथा नौजवान साथियों को संबोधित करते हुए कहा की महाशिवरात्रि पर्व पर व्रत उपवास करते हैं तथा भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं, शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं भगवान शिव बड़े दयालु हैं, बड़े भोले हैं, भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए एक लोटा जल और कुछ बेलपत्र ही पर्याप्त रहता है आवश्यकता होती है तो सिर्फ श्रद्धा और भाव की। समुद्र मंथन के दौरान जब कालकूट नाम का विष निकला तो पूरी सृष्टि में हाहाकार मच गया, यह विष इतना भयानक था जिसके प्रभाव से पूरी सृष्टि समाप्त हो सकती थी तब सभी देवता गण भगवान शिव के पास गए और उन्हीं की प्रार्थना की, तब सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव ने कालकूट नाम के विष को अपने कंठ में धारण किया जिसके कारण उनका कंठ नीला पड़ गया और हम तभी से भगवान शिव को नीलकंठ के नाम से भी पुकारते हैं। भगवान शिव बड़े ही भोले हैं जो अपने भक्तों पर सदैव अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं। महाशिवरात्रि पर्व को भारत में भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न भिन्न प्रकार की मान्यताओं के साथ मनाते हैं, कोई महाशिवरात्रि को माता पार्वती और भगवान शिव के विवाह के रूप में मनाते हैं, तो कोई भगवान शिव के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं, तो कोई महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए इस रूप में पूजते हैं, तो कोई महाशिवरात्रि पर्व के दिन भगवान शिव ने कालकूट नाम के विष को पीकर सृष्टि को बचाया इस रूप में पूजते हैं, कारण चाहे जो भी हो लेकिन शिक्षा हमें एक ही मिलती है कि हम गलत मार्ग को छोड़कर सही मार्ग पर चलें सच्चाई का साथ दें तथा राष्ट्र व समाज हित में कार्य करें तथा बुराई रूपी राक्षस का संहार करें। गोपाल शर्मा ने कहा कि यह भारत की विशेषता है और भारत की सभ्यता सनातन संस्कृति का ही प्रभाव है जिसके कारण हम देश पर आई बड़ी से बड़ी विपदा का भी डटकर सामना करते हैं, कोरोना नाम की महामारी ने जब पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया तथा भारत में प्रवेश किया तब लोगों को लगता था कि भारत को कोरोना के कारण शायद सबसे अधिक क्षति होगी लेकिन यह हमारी भारतीय सभ्यता और संस्कृति की पहचान है कि जब कोरोना महामारी भारत के अंदर आई तो सरकार ने एक अच्छी योजना के आधार पर कार्य करते हुए जरूरतमंद लोगों को फ्री राशन उपलब्ध कराया तथा सरकार के साथ जरूरतमंद लोगों के सहयोग के लिए भारत के अंदर एक बड़ी संख्या में लोग आगे बढ़ कर आए और राशन व जरूरत के सामान, जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया तथा सभी ने संगठित होकर एकजुटता से कोरोना महामारी का मुकाबला कर कोरोना महामारी को हराया। आज भारत दुनिया भर के अंदर बहुत तेजी से उभर रहा है, यह सब भारत का मजबूत नेतृत्व व भारतीय नागरिकों का राष्ट्रहित में संगठित होने के कारण संभव हो पा रहा है। हमारा भारत देश जो अमेरिका से कर्ज लेता था आज अमेरिका को कर्ज देने वाला बन गया है, जो भारत विदेशों से वैक्सीन खरीदने के लिए लाइन में लगता था आज कोरोना महामारी की वैक्सीन बनाकर पूरी दुनिया को सप्लाई कर रहा है, जो भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए दूसरे देशों से हथियार खरीदता था वही भारत आज मेड इन इंडिया के तहत हत्यार बनाकर दुनिया भर के देशों को हत्यार बेच रहा है, जिस भारत में पीपीई किट नहीं बनती थी वहीं भारत आज पीपीई किट बनाने में दुनिया का दूसरा बड़ा देश बन गया है, यह सब भारतीय नागरिकों के जागरूक होने तथा राष्ट्रवादी विचारधारा को आगे बढ़ा कर उनके हाथ में नेतृत्व देने के कारण ही संभव हो पा रहा है। ग…

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