अपने ही महकमे को भूले मुख्यमंत्री, राजस्व निरीक्षक/लेखपाल पदोन्नति से वंचित

अपने ही महकमे को भूले मुख्यमंत्री, राजस्व निरीक्षक/लेखपाल पदोन्नति से वंचित
राजस्व निरीक्षक व नायब तहसीलदार के 60 परसेंट से अधिक पद खाली

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विभिन्न विभागों में पदोन्नति मुख्यमंत्री की शीर्ष प्राथमिकताओं में बना हुआ है! पदोन्नति के मुद्दे पर सक्रियता धरातल पर दिख रही है तथा वरिष्ठ अधिकारियों यथा पीसीएस आईएएस की पदोन्नति सुर्खियां भी बटोर रही है

लेकिन मुख्यमंत्री व शासन की महत्वाकांक्षी व लोकलुभावन योजनाओं को धरातल पर लाने वाले लेखपाल तथा राजस्व निरीक्षक की पदोन्नति की चिंता किसी को भी नहीं है।
कमोबेश हालत यह है कि लगभग 2 वर्ष से राजस्व निरीक्षक से नायब तहसीलदार व लेखपाल से राजस्व निरीक्षक के पद पर कोई पदोन्नति नहीं हुई है

जबकि नायब तहसीलदार में पदोन्नति के माध्यम से भरे जाने वाले पदों का कोटा 50 प्रतिशत है तो वहीं राजस्व निरीक्षक में 100 प्रतिशत है! वर्तमान में काम के दबाव की स्थिति यह है कि 1-1 लेखपाल को तीन-तीन अतिरिक्त क्षेत्र,

वहीं राजस्व निरीक्षक को 5-5 अतिरिक्त क्षेत्रों का कार्यभार देखना पड़ रहा है जबकि नायब तहसीलदार के अधिकांश पद तो खाली ही हैं! अतिरिक्त काम के अनावश्यक दबाव का प्रतिफल जन शिकायतों के बढ़ते अंबार के रूप में सामने आ रहा है, साथ ही साथ फील्ड कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्य पूर्ण न कर पाने की सजा विभागीय कार्रवाईयों के रूप में देखनी पड़ रही है!

विडंबना है कि आला अधिकारियों ने तो आगामी चयन वर्ष तक पदोन्नति संपन्न करा ली है लेकिन जनता के बीच रहकर लोक शिकायतों का निराकरण करने वाले राजस्व निरीक्षक व लेखपालों की ज्येष्ठता सूची तक अंतिम नहीं कर पाए हैं!

कमोबेश वर्ष 2018 से एक भी पदोन्नति ना होना इस बात का द्योतक है की आला अधिकारियों को सिर्फ अपनी चिंता है, क्षेत्रीय कर्मचारी चाहे जिए अथवा मरे!
मुख्यमंत्री जी का निर्देश है की पत्रावली प्रत्येक दशा में सात दिवस में निस्तारित होनी चाहिए लेकिन उनकी नाक के नीचे राजस्व परिषद तथा शासन पदोन्नति पत्रावलियों को एक पटल से दूसरे पटल तक घुमाने में इस कदर व्यस्त हैं कि 2 वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर भी राजस्व निरीक्षक तथा लेखपाल की ज्येष्ठता सूची व पदोन्नति लंबित है!

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