उत्तरी छत्तीसगढ़ के जंगल में 60 घंटे में तीसरे हाथी का मिला शव, जानें क्‍यों हुई मौत

अंबिकापुर, राज्‍य ब्‍यूरो। उत्तरी छत्तीसगढ़ में 60 घंटे के भीतर तीसरे हाथी का शव मिलने से वन विभाग में खलबली मच गई है। गुरुवार को बलरामपुर जिले के राजपुर वन परिक्षेत्र के करवां जंगल में हथिनी का शव मिला। शव की स्थिति देखकर चिकित्सकों ने आशंका जताई है कि शव कई दिन पुराना है। प्रथम दृष्टया तीनों में दो हाथिनी की मौत विषाक्त पदार्थ के सेवन से होने की आशंका जताई जा रही है। बुधवार और गुरुवार को मिले हाथियों के शव का पोस्टमार्टम करने के बाद बिसरा जांच के लिए सुरक्षित किया गया है।

घटना को मानव-हाथी द्वंद्व के रूप में देखा जा रहा 

पहले हाथी के शव का पोस्टमार्टम करने के दौरान बिसरा नहीं लिया गया था। इस पर सवाल उठने के बाद गुरुवार को हाथी की कब्र खोद कर बिसरा निकाला गया। बिसरा जांच के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून भेजा जाएगा। बता दें कि इस क्षेत्र में हाथियों का खासा आतंक है। इसे मानव-हाथी द्वंद्व की घटना के रूप में भी देखा जा रहा है। इससे पहले लगातार दो दिन सूरजपुर जिले के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के गणेशपुर जंगल में दो हथिनी का शव मिला था। इसी वन क्षेत्र से जुड़े बलरामपुर जिले के करवां जंगल में तीसरा शव मिलने से मानव-हाथी द्वंद्व की आशंका को बल मिला है।

हाथियों की मौत स्वाभाविक नहीं

अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अरुण पांडेय सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने दोनों हथिनियों के शव को देखा। वन अधिकारियों की मौजूदगी में रायपुर से पहुंची चिकित्सकों की टीम ने पोस्टमार्टम किया। एपीसीसीएफ अरुण पाण्डेय ने स्वीकार किया कि हाथियों की मौत स्वाभाविक नहीं लग रही है। उन्होंने कहा कि हाथियों की मौत जहरीला पदार्थ खाने या पीने से हो सकती है। इसलिए बिसरा जांच के लिए भेजा जा रहा है। पहले दिन जिस हाथी का शव मिला था, उसके लीवर में इंफेक्शन और सिस्ट मिला था। इस कारण बिसरा लेने में स्थानीय अधिकारियों से चूक हो गई थी।

 

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