Monday, July 13, 2020

कोविड-19 महामारी से पूरी दुनिया थम गई है लेकिन इसका बहुत ज्यादा असर दुनिया के प्रमुख चरमपंथी संगठनों पर नहीं दिख रहा है. इनमें से कुछ संगठनों का तो मानना है कि इस वायरस को ऊपर वाले ने ही उनके दुश्मन, पश्चिमी दुनिया को खत्म करने के लिए भेजा है.

बीबीसी मॉनिटरिंग ने तीन सबसे ख़तरनाक चरमपंथी संगठनों की गतिविधियों को आकलन किया है. इनमें इस्लामिक स्टेट, अल कायदा का साहेल शाखा जमात नुसरत अल इस्लाम वाल मुस्लिमीन (जेएनआईएम) और सोमालिया के अल शबाब शामिल हैं.

इन तीनों चरमपंथी संगठनों के आधिकारिक या उनके सहयोगी मीडिया आउटलेट्स पर मौजूद आंकड़ों के मुताबिक मार्च में जब कोविड-19 ने दुनिया भर को अपनी चपेट में ले लिया था तब भी पिछले दो महीनों की तुलना में इन संगठनों के हमले कम नहीं हुए थे.

इससे यह पता चलता है कि चरमपंथी संगठनों ने कोविड-19 को लेकर अपनी गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया है. उल्टे इस्लामिक स्टेट ने अपने लड़ाकों से मौजूदा संकट के समय का फायदा उठाकर ज्यादा हमले करने की मांग की है.

हालांकि अभी तक इसका आकलन नहीं हुआ है कि जिन देशों में इन संगठनों का बहुत ज्यादा असर है वहां कोविड-19 संक्रमण फैलने के बाद उन संगठनों का रवैया कैसा रहा है. ये संगठन मिडिल ईस्ट, पश्चिमी और पूर्वी अफ्रीका में सक्रिय हैं. अब तक इन संगठनों ने कोविड-19 को चीन, अमरीका और यूरोपीय देशों के संकट के तौर पर ही देखा है.

इस आकलन के लिए इस्लामिक स्टेट, जेएनआईएम और अल शबाब का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि ये दुनिया के सबसे ख़तरनाक और सक्रिय चरमपंथी संगठन हैं. इसके अलावा इन संगठनों के अपने ऑनलाइन मीडिया आउटलेट्स हैं जिसके चलते आंकड़ों को जुटाना सहज होता है

इन आंकड़ों में उन हमलों को शामिल किया गया है जिसको करने का दावा इन संगठनों ने अपने मीडिया आउटलेट्स पर किया है. हालांकि यह संभव है कि अपनी ताकत को बढ़ा चढ़ाकर बताने की कोशिश में संगठनों ने हमलों की संख्या ज्यादा बताई हो.

इस्लामिक स्टेट के आंकड़ों के लिए आईएस के आधिकारिक नाशिर न्यूज एजेंसी मीडिया पर दर्ज आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है. इसमें अल-नबा समाचार पत्र में शामिल दावों को शामिल नहीं किया गया है, दावों में हमलों की संख्या अधिक है.

इस अध्ययन में दूसरे चरमपंथी संगठनों को इस वजह से शामिल नहीं किया गया है-

29 फरवरी को अमरीका के साथ हुए शांति समझौते के बाद मार्च महीने में अफगान तालिबान के हमलों में कमी आई है. इस समझौते के मुताबिक अफगान सरकार तालिबान लड़ाकों को जेल से रिहा करना है, अफगानी तालिबान हमलों की संख्या बढ़ाकर अपने साथियों की रिहाई को संकट में नहीं डालना चाहता. हालांकि माना जा रहा है कि गर्मी के महीने में तालिबान के हमलों की संख्या बढ़ सकती है, हालांकि इसकी कोई घोषणा नहीं हुई है.

बोको हराम ऐतिहासिक तौर पर स्थिर और आसानी से जानकारी देने वाला ऑनलाइन मीडिया आउटलेट्स विकसित नहीं कर पाया है. इसलिए इस समूह की गतिविधियों को व्यवस्थित ढंग से ट्रैक करना बेहद मुश्किल होता है.

उत्तरी सीरिया के चरमपंथी समूह हयात तहरीर अल शाम (एचटीएस) का नियंत्रण इदलिब प्रांत के अधिकांश हिस्सों पर हैं. इस समूह की गतिविधियों को भी ट्रैक नहीं किया गया क्योंकि संगठन की गतिविधियों में छह मार्च को किए शांति समझौते के बाद कमी आई है. हालांकि इस समझौते का विभिन्न पार्टियों की तरफ से उल्लंघन भी होता रहा है बावजूद इसके समझौते के बाद इदलिब और उसके निकटवर्ती हिस्सों में चरमपंथी हमलों में कमी देखने को मिली है. हालांकि अलल कायकदा के सीरियाई शाखा के तौर पर करने वाले संगठन हुर्रास अल दीन ने मार्च महीने में कुछ वारदातों को अंजाम जरूर दिया है लेकिन वे लो प्रोफाइल की घटनाएं थीं.

मार्च के आखिरी दिनों में सीरिया पर फोकस करने वाली जेहादी पत्रिका ने दावा किया था कि कोविड-19 के बाद उत्तर सीरिया संघर्ष में कमी जरूर हुई है लेकिन यह चरमपंथियों के पक्ष में है. बालाह पत्रिका ने विस्तार से बताया है कि महामारी के चलते सीरिया और रूस के सशस्त्र बल की प्राथमिकताएं बदल गई हैं और अब उनका ध्यान महामारी पर अंकुश लगाने पर ज्यादा है.

इसके अलावा अन्य संगठनों को इस अध्ययन में शामिल नहीं किया गया क्योंकि उनका असर बेहद सीमित है और वे छिटपुट चरमपंथी घटनाओं में संलिप्त रहे हैं. जैसे कि यमन में सक्रिय अल कायदा की शाखा (एक्यूएपी) ने तीन महीने में ऐसी कई घटनाओं को अंजाम दिया है.

इस्लामिक स्टेट के मार्च में किए हमलों से जाहिर होता है कि संगठन की गतिविधियों में जनवरी-फरवरी की तुलना में कोई फर्क नहीं आया है. वास्तविकता यह है कि मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में, इस्लामिक स्टेट ने कई खतरनाक हमले किए हैं, इसमें अफगानिस्तान में सिखों पर हुए हमले से लेकर मोजाम्बिक और पश्चिम अफ्रीकी देशों में सुरक्ष बल पर हुए हमले शामिल हैं.

इस्लामिक स्टेट कोविड-19 के समय दुनिया भर के संकट को अवसर में बदलने की कोशिशों में जुटा है.

मार्च में इस्लामिक स्टेट ने अपने चरमपंथी हमलावरों और समर्थकों से अपील की कि इस महामारी के समय में दुनिया भर में चरमपंथी हमले ज्यादा किए जाएं. संगठन की ओर से कहा गया कि सरकार और उनकी सेनाएं इस वक्त कोविड-19 पर अंकश में जुटी है लिहाजा इस वक्त का फायदा उठाना चाहिए.

चरमपंथी संगठन ने अपने समर्थकों से कोविड-19 से बचाव की अपील भी की है. संक्रमण से बचने के लिए स्वास्थ्य पर ध्यान देने के अलावा साफ सफाई बरतने की अपील भी की गई है. इसके अलावा संक्रमित इलाकों में आने जाने से भी मना किया गया है. हालांकि कुछ पश्चिमी मीडिया आउटलेट्स के मुताबिक इस्लामिक स्टेट ने अपने साथियों के यूरोप यात्रा पर पाबंदी लगा दी है हालांकि इस्लामिक स्टेट की एडवाइजरी में ऐसा नहीं कहा गया है.

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