मुजफ्फनगर, जेएनएन। अक्‍सर फिल्‍मों में जमीन पर कब्‍जा जमाने के तरीके को देखा होगा। इससे मिलता-जुलता घटनाक्रम मुजफ्फरनगर के ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहा है। जहां सूदखोर गांव के छोटे किसानों का आसियाना उजाडऩे में लगे है। मजबूरी का फायद उठाकर पांच से दस फीसदी तक का ब्याज वसूलते है। पैसे अदा न कर पाने पर उसकी जमीन व मकान पर कब्जा कर दबंगा दिखाते है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर पुलिस इन लोगों की सहयोगी बनकर गरीबों को परेशान करने में हिचक तक नहीं दिखाती है।

किसान की हत्‍या में खुल रहे राज

मीरापुर दलपत में किसान प्रवेश की हत्या के बाद ग्रामीण क्षेत्र के सूदखोरों की कलई खोल कर रख दी है। प्रवेश की हत्या पहला ही मामला नहीं है बल्कि कई मामलों में ऐसे हादसे हो चुके है। प्रवेश का बड़ा भाई प्रेम भी इन सूदखोरों के चक्कर में पड़कर अपनी जमीन गंवा कर घर से बेघर होकर दौराला रहने लगा था। इन सूदखोरों के चक्कर में पड़कर पूरा परिवार बर्बाद हो चुका है। सूदखोरो से लिया हुआ पैसा प्रवेश की जमीन ही नहीं जान लेकर भी चला गया। इन सूदखोरों को ब्याज इतना अधिक होता है कि प्रवेश द्वारा लिया गया ढाई लाख रूपया देखते ही देखते 7.5 लाख तक पहुंच गया। उससे न तो असल ही दिया गया और न ब्जया ही दिया गया।

ब्‍याज में ही गवां देते है पूरे पैसे

सूत्रों की माने तो जब भी उसके पास थोड़े से पैसे हुए तो ब्याज में बताकर खत्म हो गए। इस सूद खोरों के आगे पुलिस भी नतमस्तक होती है। अक्सर देखा जाता है कि पुलिस भी किसी लालच के तहत इन सूदखोंरों के दबाव में आकर अक्सर गरीबों लोगों को दबाव में लेती है। ऐसे ही आरोप मृतक की पत्नी ङ्क्षपकी पर भी लगाए थे। उसका आरोप था कि वह कई बार इन सूदखोरों की गाली गलौच से तंग आकर पुलिस चौकी पर गई लेकिन उसे ही उल्टा धमका कर भगा दिया गया। उसने बताया कि गांव के सूदखोर अक्सर आकर उसके परिवार को गाली गलौच करते थे।