देश की पहली रैपिड रेल का सपना पूरा होगा

देश की पहली रैपिड रेल का सपना पूरा होगा। दिल्ली से मेरठ के बीच चलाई जाने वाली रैपिड रेल के रोलिंग स्टॉक का निर्माण गुजरात के सांवली प्लांट में किया जाएगा। यह जानकारी शहरी विकास मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने ट्वीट करके दी। रैपिड रेल के कोच मेड इन इंडिया होंगे। इसे लेकर एनसीआरटीसी भी काफी उत्साहित है।

हाल ही में मेक इन इंडिया इनिशिएटिव के तहत दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर के रोलिंग स्टॉक की खरीद को अंतिम रूप दे दिया गया है। आरआरटीएस के सभी ट्रेन सेट का निर्माण बॉम्बार्डियर ट्रांसपोर्टेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा उसके सांवली (गुजरात) स्थित प्लांट में किया जाएगा। भारत सरकार की मेक इन इंडिया नीति के अनुसार, कम से कम 75 फीसदी निर्माण भारत में करना आवश्यक है, जिसमें 50 फीसदी से अधिक स्थानीय सामग्री का उपयोग करना भी अनिवार्य है।
40 ट्रेन सेट का निर्माण करेगी बॉम्बार्डियर मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुधीर कुमार शर्मा ने बताया कि बॉम्बार्डियर को यह अनुबंध मिलने के साथ ही यह तय हो गया है कि सभी 40 ट्रेन सेट का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। जो कि 75 फीसदी की निर्माण नीति से अधिक है। लॉकडाउन में दिन-रात काम करके एनसीआरटीसी के अधिकारियों ने इस निविदा प्रक्रिया को समयसीमा के अंदर पूरा किया है।
यह हैं खूबियां
यह हाई-स्पीड एरोडायनामिक ट्रेन सेट इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर स्व-चालित होंगे। रोलिंग स्टॉक की डिलीवरी 2022 में शुरू होगी। निर्माण की शर्तों में डिजाइन, निर्माण, आपूर्ति, परीक्षण और कमीशनिंग शामिल हैं। छह कोच वाले 30 ट्रेन सेट का उपयोग रीजनल ट्रांजिट सेवाओं के लिए होगा। तीन कोच वाले 10 ट्रेन सेट का उपयोग मेरठ में स्थानीय ट्रांजिट सेवाओं के लिए होगा। इन ट्रेनों में हवा के घर्षण और बाहर की आवाज को कम करने के लिए स्वचालित प्लग-इन प्रकार के दरवाजे होंगे।

ये ट्रेन अंत: संचालित होंगी यानी एक आरआरटीएस कॉरिडोर से दूसरे आरआरटीएस कॉरिडोर का सफर यात्री बिना ट्रेन बदले कर सकेंगे। इन ट्रेनों को आधुनिक ईटीसीएस लेवल-2 सिग्नलिंग सिस्टम के साथ समन्वित किया जाएगा, जिसका इस्तेमाल भारत में पहली बार होगा। ईटीसीएस लेवल-2 सिग्नलिंग सिस्टम न केवल अंत: संचालन की सुविधा देगा, बल्कि कम समय अंतराल पर ट्रेन की आवाजाही भी सुनिश्चित करेगा, जिससे यात्रियों को ट्रेन के लिए ज्यादा प्रतीक्षा नहीं करनी होगी।

यात्री सुविधा को ध्यान में रखते हुए, 3.2 मीटर चौड़ी आरआरटीएस ट्रेनों में शताब्दी एक्सप्रेस की तरह 2गुना2 ट्रांसवर्स बैठने की व्यवस्था होगी। यात्रियों के खड़े होने के लिए भी उचित व्यवस्था होगी। सामान रखने के लिए पर्याप्त जगह, सीसीटीवी कैमरे और अन्य आधुनिक सुविधाएं ट्रेन में उपलब्ध होंगी। इन वातानुकूलित ट्रेन में इकॉनमी और बिजनेस क्लास के कोच होंगे। प्रत्येक ट्रेन में एक बिजनेस क्लास कोच होगा और एक कोच महिलाओं के लिए आरक्षित होगा।

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