फीचर फ़िल्म “बॉस क्लाइमेक्स अभी बाकी है” में प्रोफ़ेसर मोहिनी की भूमिका से सुर्ख़ियों में आई स्नेह सचान ने बॉलीवुड तक फहराया

फ़िल्मसिटी साकार करेगी कलाकारों के सपने

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फीचर फ़िल्म “बॉस क्लाइमेक्स अभी बाकी है” में प्रोफ़ेसर मोहिनी की भूमिका से सुर्ख़ियों में आई स्नेह सचान ने बॉलीवुड तक फहराया परचम और बढ़ाया उत्तरप्रदेश मान ..अपने दो साल के फ़िल्मी कैरियर में लगभग 60 लघु फ़िल्में

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जिसमें “माँ मुझे मार दे” को खजुराहो इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल में अवार्ड से नवाज़ा गया उसके बाद स्नेह सचान को “परिवर्तन” संस्था द्वारा अवार्ड इसलिए दिया गया

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क्योंकि स्नेह सचान ने अपनी भूमिकाओं में भारतीय संस्कारों को प्रमुखता दी ..फीचर फ़िल्म “शालिनी वर्सेज़ मालिनी” में एक बार फिर दर्शकों को भारतीय संस्कारों की झलक भाई बहन का अटूट प्रेम नज़र आएगा “शालिनी वर्सेज़ मालिनी” में स्नेह सचान आर्यन सिंह की बहन का दमदार किरदार निभाया है .

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.वेब सीरीज ज़िंदगी 99 किलोमीटर में स्नेह सचान की मुख्य भूमिका है उनके सह कलाकार प्रदीप गौर ,सुभाष मिश्रा ,जीतेन्द्र दीक्षित ,श्रेया द्विवेदी और नीरज तिवारी हैं ..ज्यादातर वेब सीरीज गाली गलौज और नंगापन और फूहड़ता से भरी होती हैं लेकिन ज़िंदगी 99 किलोमीटर एक साफ़ सुथरी वेब सीरीज है जिसकी वजह हैं कानपुर की स्नेह सचान ..

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माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने जब उत्तरप्रदेश में ‘फ़िल्मसिटी” की घोषणा की तो पूरे उत्तर प्रदेश के कलाकारों के अन्दर ख़ुशी की लहर दौड़ गयी तमाम क्षेत्रीय कलाकारों ने फ़िल्मसिटी के बारे अलग अलग जगहों पर बनने की राय दी ..
लखनऊ के एक रेसॉर्ट नरेशंस ब्लू में फिल्मसिटी पर डाक्यूमेंट्री शूट चल रहा था जहाँ हमारी मुलाक़ात मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री स्नेह सचान से हुई और हमने जब उनसे फ़िल्म सिटी पर सवाल जवाब किये और फ़िल्म सिटी पर उनकी राय जानी ..पेश हैं उसी के कुछ मुख्य अंश ..
बॉलीवुड और फ़िल्म सिटी उत्तर प्रदेश के बारे में आपकी क्या राय है ..?
निसंदेह बॉलीवुड देश के कलाकारों के लिए एक बहुत बड़ा प्लेटफार्म है लेकिन उत्तर प्रदेश में फ़िल्म सिटी बनने का मतलब है

कि हमारे प्रदेश हर एक कलाकार के सपनों को उड़ान मिलेगी ..वैसे भी उत्तर प्रदेश के हर गली कूचे में कला के फूल खिलते हैं लेकिन वे फूल मुंबई तक जाते-जाते कई बार मुरझा जाते हैं और अपनी पहचान बना पाने में सफल नहीं हो पाते ..लेकिन अब जब हमारे प्रदेश में ही फ़िल्म सिटी बन जायेगी

तो हर कलाकार फ़िल्म सिटी में अपनी दस्तक दे सकता है ..हर कलाकार को बेहतर अवसर मिलेगा ..क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों का निर्माण होगा लेखक निर्माता और निर्देशक कम बजट में अपनी फ़िल्में बना सकेंगे ..रोज़गार के नए अवसर मिलेंगे …जिससे हमारे प्रदेश का विकास होगा.
प्रश्न: बॉलीवुड के संघर्ष के बारे में कुछ बताएं ..मेरा मतलब है क्या आपके साथ कास्टिंग काउच जैसी घटना हुई ..?
बॉलीवुड में जाना मेरा सपना था लेकिन बॉलीवुड में तरह तरह की अफवाहें मन में डर भी पैदा करती थीं एक बार हिम्मत करके कानपुर में फोटो सेसन करवाया वो फोटोग्राफ्स हमारे बाबूजी

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